एग्रीपहल में हमारा मिशन केवल कृषि उत्पादों की आपूर्ति करना नहीं है, बल्कि भारतीय कृषि के परिदृश्य को जड़ से बदलना है। हमारा लक्ष्य एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जहाँ खेती केवल जीवन जीने का साधन न रहकर, एक गौरवशाली और लाभदायक व्यवसाय बने।
हम अपने मिशन को निम्नलिखित चार प्रमुख स्तंभों के माध्यम से प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं:
1. वैज्ञानिक नवाचार और पारंपरिक ज्ञान का संगम
हमारा प्राथमिक मिशन आधुनिक जैव-रसायन (Bio-chemistry) और तकनीकी प्रगति को किसान के पारंपरिक अनुभव के साथ जोड़ना है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि प्रयोगशाला में होने वाले शोध का लाभ सीधे खेतों तक पहुँचे, जिससे फसल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार हो।
2. मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता का संरक्षण
हमारा मिशन "धरती माता" की उर्वरता को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।
-
रासायनिक निर्भरता को कम करने के लिए बायो-पेस्टिसाइड्स और ह्यूमिक एसिड जैसे जैविक विकल्पों को बढ़ावा देना।
-
मिट्टी में कार्बन की मात्रा और सूक्ष्मजीवों (Microbial life) को पुनर्जीवित करना।
-
ऐसे समाधान प्रदान करना जो कीटों पर तो प्रभावी हों, लेकिन पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हों।
3. परिचालन दक्षता और लागत में कमी
हमारा लक्ष्य किसान की मेहनत को कम करना और उसके मुनाफे को बढ़ाना है।
-
सटीक कृषि (Precision Farming): उन्नत स्प्रेयर और सिंचाई उपकरणों के माध्यम से पोषक तत्वों की बर्बादी को रोकना।
-
लागत नियंत्रण: खेती की इनपुट लागत (Input cost) को कम करके किसान की 'शुद्ध आय' (Net Income) को अधिकतम करना।
-
श्रम की बचत: एर्गोनोमिक उपकरणों के माध्यम से कृषि कार्यों को आसान और तेज बनाना।
4. किसान से 'कृषि-उद्यमी' तक का सफर
हमारा अंतिम मिशन किसान की पहचान को बदलना है। हम किसानों को केवल अन्नदाता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक 'एग्री-एंटरप्रेन्योर' के रूप में देखना चाहते हैं।
-
एकीकृत कृषि (Integrated Farming): किसानों को बहु-फसली और एकीकृत प्रणालियों के लिए प्रेरित करना ताकि वे जोखिम कम कर सकें और आय के विभिन्न स्रोत बना सकें।
-
आत्मनिर्भरता: किसानों को ज्ञान और तकनीक से इतना सक्षम बनाना कि वे अपने निर्णय स्वयं ले सकें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

0 comments